माँ,
तेरी बेटी अब बड़ी हो चुकी है ।
जो बीस साल पहले
तेरी गुड़िया हुआ करती थी
आज वह खुद गुड़िया छोड़
कलम पकड़ी हुई है,
तेरे लिए, आँसूओं के साथ।
माँ,
तुझे शायद अंदाजा नहीं
तेरी बेटी अब खुद को संभाल सकती है;
हर एक मामलों में
सबकी दखलंदाजी उसे पसंद नहीं है
फिर भी आँसुओ के बीच
रातों की नींद खो देती है वह
अंधेरे में तेरी रूठी हुई पल्लू को ढूंढते ढूंढते ।
माँ,
हर बात पे तेरा टोकना मुझे पसंद नहीं
हर काम में तेरी डांट से मैं
उब चुकी हूँ
पर थोड़ा तो समझने की कोशिश कर
ऐसे तेरी चुप्पी मुझे बरदास्त नहीं
तू मेरा हाथ छोड़ दे, यह मुझे मंजूर नहीं ।
माँ,
तू तो बचपन में
मेरे बेवजह रोने का वजह जान लेती थी ;
आज तेरी मुहँबोली बेटी का
दिल टटोलकर तो देख
तेरी बेटी उतनी भी बुरी नहीं
बहस तो बहुत करती है तेरे साथ,
पर तेरे प्यार के साथ कोई समझौता नहीं ।
माँ,
मैं खुद को कितनी भी मजबूत दिखाऊँ
कितनी भी खुदगर्ज़ बन जाउँ
पर किसीको कहती नहीं
दिल से बहुत नाजुक हूँ
तेरे साथ के बिना टूटके बिखर जाउंगी
मैं जानती हूँ तुझे मुझसे नफरत नहीं
पर तेरा मुझसे मुँह मोड़ लेना मुझे स्वीकार नहीं ।






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